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उत्तरप्रदेशलखनऊ

महाशिवरात्रि पर गुलजार उपवन में भव्य झांकी व तीन दिवसीय सांस्कृतिक मेले का शुभारंभ।

ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन, राजयोग प्रशिक्षण केंद्र में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आध्यात्मिक मेले का उद्घाटन किया गया।

महाशिवरात्रि पर गुलजार उपवन में भव्य झांकी व तीन दिवसीय सांस्कृतिक मेले का शुभारंभ।

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
लखनऊ, 14 फरवरी।

ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन, राजयोग प्रशिक्षण केंद्र में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आध्यात्मिक मेले का उद्घाटन किया गया।

इस विशेष कार्यक्रम में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों को दर्शाती हुई आकर्षक एवं आध्यात्मिक झांकी तैयार की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

कार्यक्रम परिसर में बच्चों के लिए झूले, मनोरंजन की विशेष व्यवस्था तथा विभिन्न खान-पान के स्टॉल भी लगाए गए हैं।

प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।

यह तीन दिवसीय आयोजन है, जिसमें प्रतिदिन प्रातः एवं सायं विभिन्न विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में पधारकर अपने विचार व्यक्त करेंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नगरवासी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। विशाल द्वारा प्रस्तुत सुंदर कत्थक नृत्य तथा “जय हो, जय हो शिव शंकरा” गीत पर मनोहारी प्रस्तुति ने सभी आगंतुकों को शिव की स्मृति में भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर शिवमय हो उठा और उपस्थित श्रद्धालु शिव परमात्मा की याद में आत्मिक आनंद का अनुभव करने लगे।

इस अवसर पर केंद्र संचालिका राधा दीदी ने महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब संसार दुःख, क्रोध और अशांति से व्याप्त हो जाता है, तब आत्माएं अपनी वास्तविक पहचान को भूल जाती हैं। ऐसे समय में परमपिता परमात्मा शिव मानव रूप में जन्म नहीं लेते, बल्कि दिव्य ज्योति स्वरूप में अवतरित होकर आत्माओं को जागृत करते हैं और उन्हें पुनः शांति, पवित्रता एवं सुख के मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। यही दिव्य क्षण “शिवरात्रि” के रूप में मनाया जाता है। इस पावन रात्रि में ईश्वरीय प्रकाश इस धरा पर आकर अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है।

राधा दीदी ने यह भी बताया कि गुलजार उपवन, राजयोग प्रशिक्षण केंद्र में प्रतिदिन प्रातः 7 से 8 बजे तथा सायं 7 से 8 बजे तक निशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें कोई भी व्यक्ति आकर आत्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि इस अंधकारमय युग में जीवन-जागृति, आत्मचेतना और दिव्य शक्ति के अवतरण का पावन दिवस है, जो मानव को अपने भीतर की रोशनी पहचानने और परमात्मा से संबंध जोड़ने की प्रेरणा देता है।

झांकी के माध्यम से राजयोग शिक्षा का महत्व तथा परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग भी भक्तजनों को समझाया जा रहा है।

इस विशेष कार्यक्रम में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों को दर्शाती हुई आकर्षक एवं आध्यात्मिक झांकी तैयार की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

कार्यक्रम परिसर में बच्चों के लिए झूले, मनोरंजन की विशेष व्यवस्था तथा विभिन्न खान-पान के स्टॉल भी लगाए गए हैं। प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।

यह तीन दिवसीय आयोजन है, जिसमें प्रतिदिन प्रातः एवं सायं विभिन्न विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में पधारकर अपने विचार व्यक्त करेंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नगरवासी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। विशाल द्वारा प्रस्तुत सुंदर कत्थक नृत्य तथा “जय हो, जय हो शिव शंकरा” गीत पर मनोहारी प्रस्तुति ने सभी आगंतुकों को शिव की स्मृति में भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर शिवमय हो उठा और उपस्थित श्रद्धालु शिव परमात्मा की याद में आत्मिक आनंद का अनुभव करने लगे।

झांकी के माध्यम से राजयोग शिक्षा का महत्व तथा परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग भी भक्तजनों को समझाया जा रहा है, जिससे वे अपने जीवन में शांति, सुख एवं आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव कर सकें।

आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों से इस पावन अवसर पर परिवार सहित उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ लेने का आग्रह किया है।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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